2 लाइन्स |2 line sanskrit shlokas with meaning

  2 लाइन्स  श्लोक|2 lines sanskrit shlokas with meaning



  गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिंतयेत्‌।
वर्तमानेन कालेन वर्तयंति विचक्षणाः॥

Meaning:- किसी को अतीत पर पछतावा नहीं करना चाहिए।
किसी को भविष्य की चिंता नहीं करनी चाहिए।
वर्तमान समय में समझदार पुरुष कार्य करते हैं।



  यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌ ॥

Meaning:- जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब मैं आता हूं, जब जब

 अधर्म बढ़ता है तब तब मैं साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूं|

 ✌ यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्‍क्षति।
शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः

Meaning:- जो न कभी हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है,

 न कामना करता है तथा जो शुभ और अशुभ सम्पूर्ण कर्मों का त्यागी है-

 वह भक्तियुक्त पुरुष मुझको प्रिय है ।
 
 ✌ न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्‌ । 
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः

Meaning:- निःसंदेह कोई भी मनुष्य किसी भी काल में क्षणमात्र भी बिना

 कर्म किए नहीं रहता क्योंकि सारा मनुष्य समुदाय प्रकृति जनित गुणों

 द्वारा परवश हुआ कर्म करने के लिए बाध्य किया जाता है ।

 ✌ यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः । 
आत्मन्येव च सन्तुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते ॥

Meaning:- परन्तु जो मनुष्य आत्मा में ही रमण करने वाला और आत्मा

 में ही तृप्त तथा आत्मा में ही सन्तुष्ट हो, उसके लिए कोई कर्तव्य नहीं है ।

Previous
Next Post »