संस्कृत श्लोक Famous shlokas from bhgavad gita in sanskrit with meaning in hindi

Famous Shlokas from Bhagvad gita in Sanskrit with meaning in Hindi



श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय:

ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥

 

इस श्लोक का अर्थ है:- श्रद्धा रखने वाले मनुष्य, अपनी इन्द्रियों पर संयम

रखने वाले मनुष्य, साधनपारायण हो अपनी तत्परता से ज्ञान प्राप्त कते

हैं, फिर ज्ञान मिल जाने पर जल्द ही परम-शान्ति (भगवत्प्राप्तिरूप परम

शान्ति) को प्राप्त होते हैं।


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यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन: 

यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

 

इस श्लोक का अर्थ है:- श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण यानी जो-जो काम करते

हैं, दूसरे मनुष्य (आम इंसान) भी वैसा ही आचरण, वैसा ही काम करते हैं।

वह (श्रेष्ठ पुरुष) जो प्रमाण या उदाहरण प्रस्तुत करता है, समस्त मानव-

समुदाय उसी का अनुसरण करने लग जाते हैं।

 


धृतराष्ट्र उवाच

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।

मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय 1.1

 

 इस श्लोक का अर्थ है:- धृतराष्ट्र ने कहा - है संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में

युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे तथा पाण्डु के पुत्रो ने क्या किया ?

 

 पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामचार्य महतीं चमुम्

 व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धिमता ।।1.3

 

इस श्लोक का अर्थ है:- है आचार्य ! पाण्डुपुत्रों की विशाल सेना को देखे,

जिसे आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपद के पुत्र ने इतने कोशल से व्यवस्थित

किया है

 

धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्

पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङवः 1.5

 

इस श्लोक का अर्थ है:- इनके साथ ही धृष्टकेतु, चेकितान, काशिराज,

पुरूजित्, कुंतिभोज तथा शैब्य जैसे महान शक्तिशाली योद्धा भी है।


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