गायत्री मंत्र lGayatri mantra lyrics in sanskrit Easy meaning in Hindi

 गायत्री मंत्र Gayatri mantra lyrics in sanskrit  Easy meaning in Hindi

Gayantri Mantra Lyrics

भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम्,

भर्गो देवस्य धीमहि धियोयो नः प्रचोदयात्!


Gayatri Mantra lyrics meaning in Hindi हैकि हम सृष्टिकर्ताप्रकाशमान परमात्मा का ध्यानकरते हैं, परमात्माका तेज हमारीबुद्धि को सन्मार्गकी ओर चलनेके लिए प्रेरितकरें।

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 प्रभु आप हीइस सृष्टि केनिर्माता हो, आपही हम सबके दुःख हरनेवाले हो, हमारेप्राणों के आधारहे परम पितापरमेश्वर, सृष्टि निर्माता मैंनेआपका वर्ण कररहा हूं।

 

यानि उस प्राणस्वरूप, दुःख नाशक, सुख स्वरुप श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देव स्वरुपपरमात्मा को हमअन्तरात्मा में धारणकरें। परमात्मा हमारीबुद्धि को सत्मार्गपर प्रेरित करें।

 

हे परम पितापरमेश्वर मैं आपसेयही प्रार्थना करताहूं कि मुझेसदबुद्धि देना औरहमेशा सही मार्गपर चलता रहूं।

Benefits of Chanting Gayatri Mantra Lyrics 108 times 

मन को शांतकरता है: मंत्रका जाप ओमसे शुरू होताहै। इस ध्वनिका संचय आपकेहोंठ, जीभ, तालु, आपके गले औरखोपड़ी के माध्यमसे एक कंपनभेजता है, जिसेमन को अत्यंतशांत करने वालाकहा जाता हैऔर आराम करनेवाले हार्मोन कोछोड़ने में मददकरता है। क्याअधिक है, गायत्रीमंत्र के सिलेबल्सइतने तैयार किएगए हैं किवे एक व्यक्तिको ध्यान केंद्रितकरने में मददकरते हैं औरइस तरह मनको शांत करतेहैं।

 

प्रतिरक्षामें सुधार: जीभ, होंठ, मुखर गर्भनाल, तालु पर दबावऔर मस्तिष्क मेंगायत्री मंत्र के निरंतरप्रसार से उत्पन्नक्षेत्रों में आपकेसिर के चारोंओर एक प्रतिध्वनिपैदा होती है।ये कंपन हाइपोथैलेमस(एक ग्रंथि जोप्रतिरक्षा सहित कईशारीरिक कार्यों की रिहाईऔर कामकाज कोनियमित करने केलिए जिम्मेदार है) को उत्तेजित करतेहैं जो तबऔर अधिक कुशलतासे कार्य करताहै। विशेषज्ञों काकहना है कियह ग्रंथि भीखुश हार्मोन कीरिहाई के लिएजिम्मेदार है औरइसलिए शरीर केसंबंध में प्रमुखखिलाड़ी हैइसलिएआप जितने खुशहोंगे, आपकी प्रतिरक्षामजबूत होगी।

एकाग्रता और सीखको बढ़ाता है: इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योगामें प्रकाशित एकअध्ययन में पायागया कि जोलोग मंत्रों काउच्चारण करते थेउनमें बेहतर एकाग्रताऔर स्मृति होतीथी। ऐसा इसलिएहै क्योंकि जबआप गायत्री मंत्रका जप करतेहैं तो परिणामीकंपन पहले तीनचक्रों को सक्रियकरता है जोआपके चेहरे औरसिर पर मौजूदहोते हैंअर्थात्तीसरी आंख, गलाऔर मुकुट चक्र।ये तीन चक्रएकाग्रता में सुधारकरने में मददकरते हैं क्योंकिवे सीधे मस्तिष्कऔर लिंग ग्रंथि(क्राउन चक्र), आंखें, साइनस, निचले सिर, पिट्यूटरीग्रंथि (तीसरी आंख चक्र) और थायरॉयड ग्रंथि(गले चक्र) सेसंबंधित हैं। सक्रियहोने पर कंपनसंबंधित ग्रंथियों को उत्तेजितकरने में मददकरता हैएकाग्रताऔर ध्यान कोबेहतर बनाता है।आप अपने चक्रोंको संतुलित करनेमें मदद करनेके लिए योगआसनों के बारेमें पढ़ना पसंदकर सकते हैं।


अपनी श्वास को बेहतरबनाता है: मंत्रका जप करतेसमय आपको गहरीनियंत्रित साँसें लेने कीआवश्यकता होती है, जब नियमित रूपसे किया जाताहै, तो आपकेफेफड़ों के कार्यमें सुधार होताहै और इसलिएसाँस लेने मेंमदद मिलती है।गहरी सांस लेनेके अलावा यहपूरे शरीर कोऑक्सीजन देने मेंभी मदद करताहै इसलिए आपकोस्वस्थ रखता है।


FAQ On Gayatri Mantra

गायत्री मंत्र पाठ क्यों किया जाता है?

ऐसा माना जाताहै कि गायत्रीमंत्र का जापकरने से आपअपने जीवन मेंसफलता और सुखप्राप्त करते हैं।गायत्री मंत्र के नियमितजाप से व्यक्तिमन को दृढ़तासे स्थापित औरस्थिर कर सकताहै। मंत्र एकप्रशंसा की घोषणाहै, पोषण करनेवाले सूर्य औरदिव्य दोनों केलिए।

 

कौन हैं देवीगायत्री?

देवी गायत्री को अतिरिक्तरूप सेवेदमाताया वेदोंकी माता कहाजाता हैऋग, यजुर, साम् औरअथर्वइस तथ्यके प्रकाश मेंकि यह वेदोंका बहुत आधारहै। यह आधारहै, निपुण औरगुप्त ब्रह्मांड केपीछे का सच।देवी गायत्री हमारेमन में प्रकाशडालकर अंधकार कोखत्म करने केलिए जानी जातीहैं।

 

गायत्री मंत्र के जपके क्या लाभहैं?

गायत्री मंत्र के नियमितजाप से एकाग्रताऔर सीखने मेंसुधार होता है

यह शरीर सेविषाक्त पदार्थों को निकालनेके लिए जानाजाता है

यह तंत्रिका तंत्र कीसांस लेने औरकार्य करने मेंसुधार करता है

यह आपके दिलको स्वस्थ रखताहै और नकारात्मकताको दूर करताहै

गायत्री मंत्र के जपसे मन शांतहोता है

यह तनाव औरचिंता को कमकरता है


गायत्री मंत्र का जापकरने का सबसेअच्छा समय कबहै?

वेदों के अनुसार, समय के तीनगुण हैं: सत्व, रज और तम।(पवित्रता, जुनून और निष्क्रियता)

सुबह 4 से 8 बजेऔर शाम 4 से8 बजे तक सात्विकगुणवत्ता होती है

सुबह 8 से शाम4 बजे तक राजसिकहोते हैं

रात 8 बजे और4 बजे तामसिक हैं

गायत्री मंत्र का जापकरने का सबसेअच्छा समय सातवाँहै। इसलिए, गायत्रीमंत्र का सुबह4 बजे से 8 बजेके बीच औरशाम के 4 बजेका पाठ कियाजाना चाहिए।


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