Sanskrit quote marriage anniversary wishes in Sanskrit language

5/5 - (1 vote)

man and woman holding wedding rings
Photo by Kumar Saurabh on Pexels.com

Marriage Anniversary Wishes in Sanskrit |शादी की सालगिरह पर संस्कृत में बधाई संदेश

विवाहस्य वर्धापनदिनस्य अभिनन्दनानि।

भावार्थः

वैवाहिक वर्षगांठ की बधाईयाँ।

इहेमाविन्द्र सं नुद चक्रवाकेव दम्पती।

प्रजयौनौ स्वस्तकौ विश्मायुर्व्यऽश्नुताम्।।

भावार्थः

हमारी शुभकामना है कि देवों के देव इन्द्र नव-दंपत्ति को

इसी तरह एक करें जैसे चकवा पक्षी का जोड़ा रहता है,

विवाह का ये पवित्र बंधन आपके कुल की वृध्दि और संपन्नता का कारक बने।

युवयोः वैवाहिकजीवने सर्वदा शुभं भवतु।

भावार्थः

आपके वैवाहिक जीवन में हमेशा शुभ हो।

ज्यायस्वन्तश्चित्तिनो मा वि यौष्ट संराधयन्तः सधुराश्चरन्तः।

अन्यो अन्यस्मै वल्गु वदन्त एत सध्रीचीनान्वः संमनसस्क्र्णोमि।।

भावार्थः

बड़ों की छत्र छाया में रहने वाले एवं उदारमना बनो।

कभी भी एक दूसरे से पृथक न हो। समान रूप से उत्तरदायित्व

को वहन करते हुए एक दूसरे से मीठी भाषा बोलते हुए एक

दूसरे के सुख दुख मे भाग लेने वाले ‘एक मन’ के साथी बनो।

शिवदः विवाहदिवसः।

भावार्थः

शादी वर्षगांठ की शुभकामनाएं।

प्रार्थयामहे भव शतायु: ईश्वर सदा त्वाम् च रक्षतु।

पुण्य कर्मणा कीर्तिमार्जय जीवनम् तव भवतु सार्थकम्।।

भावार्थः

भगवान आपकी रक्षा हमेशा करे

और आपको हर काम में सफलता प्राप्त हो

आपका जीवन खुशियों से भरा हो

ऐसी हम आप सभी के लिए प्रार्थना करते है।

Marriage sanskrit quotes

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।

स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।

भावार्थः

जो व्यक्ति श्रेष्ठ होता है और जो कुछ भी करता है, दूसरे लोग भी वो ही करते है। अर्थात् वह जो कुछ भी कार्य करता है, उसे प्रमाण मानकर दूसरे उसका पीछा करते है।

विवाह अनुबन्धम्।

शुभं भवतु ॠषि कृत प्राचीन प्रबन्धम्।।

भावार्थः

प्राचीन भारतीय ॠषियों द्वारा अनुप्रणीत सामाजिक

प्रबन्धन के अनुसार विशेष और स्नेहा का विवाह शुभ और कल्याण प्रद हो।

(यहां पर नाम की जगह पर नवविवाहित जोड़े का नाम कर दें।)

सध्रीचीनान् व: संमनसस्कृणोम्येक श्नुष्टीन्त्संवनेन सर्वान्।

देवा इवामृतं रक्षमाणा: सामं प्रात: सौमनसौ वो अस्तु।।

भावार्थः

तुम परस्पर सेवा भाव से सबके साथ मिलकर पुरूषार्थ करो।

उत्तम ज्ञान प्राप्त करो। योग्य नेता की आज्ञा में कार्य करने वाले बनो।

दृढ़ संकल्प से कार्य में दत्त चित्त हो तथा जिस प्रकार देव अमृत की रक्षा करते हैं।

इसी प्रकार तुम भी सायं प्रात: अपने मन में शुभ संकल्पों की रक्षा करो।

Marriage anniversary sanskrit shloka

What’s your Reaction?
+1
1
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0

Leave a Comment