Swami Vivekananda:Complete Details,Biography,Thoughts,Speech,Quotes,Photo,Death

स्वामी विवेकानंद|Swami Vivekananda|Swami Vivekanand-Complete Details

Swami Vivekanand / Vivekanand full image|Swami vivekananda full image



स्वामी विवेकानंद|Swami Vivekananda|Swami Vivekannada Ke Bare Me|Biography

स्वामी विवेकानंदजी(Swami Vivekananda) को कोन  नहीं जानता? पुरे विश्व में स्वामी विवेकानंदजी का नाम मशहुर है| स्वामी विवेकानंदजी कोन  है? क्या करते थे? कहा रहते थे? उनकी पढ़ाई कहाँ तक हुवी थी? ऐसे कई सवाल हमारे मन मे आते है| तो चलो आज हम जानते है स्वामी विवेकानंदजी के बारे में|

Born: 12 January, 1863

Place of Birth: Kolkata, India

Childhood Name: Narendranath Dutta

Father: Vishwanath Dutta

Mother: Bhuvaneshwari Devi

Education: Calcutta Metropolitan School; Presidency College, Calcutta

Religion: Hinduism

Guru: Ramakrishna

Founder of: Ramakrishna Mission (1897), Ramakrishna Math, Vedanta Society of New York

Philosophy: Advaita Vedanta

Literary works: Raja Yoga (1896), Karma Yoga (1896), Bhakti Yoga (1896), Jnana Yoga, My Master (1901), Lectures from Colombo to Almora (1897)

Death: 4 July, 1902

Place of Death: Belur Math, Belur, Bengal

 

स्वामी विवेकानंदजी कोन  है?|Who is Swami Vivekanand?

स्वामी विवेकानंदजी (Swami Vivekananda) का जन्म १२ जनवरी १८६३ को कोलकाता मे एक मध्यमवर्ग कुटुंब/घर में हुवा था| उनका पूरा नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था|(स्वामी विवेकानंद का मूल नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था|) बचपन मे  उन्हेंनरेंद्र नाम से जाना जाता था| उनके पिताजी का नाम श्री. विश्वनाथ दत्त था| उनके माताजी का नाम श्रीमती भुवनेश्वरी दत्त था| उनके पिताजी श्री विश्वनाथ दत्तजी कोलकाता हाईकोर्ट के प्रसिद्ध जानेमाने वकील थे और वह पाश्चात्य सभ्यता और अंग्रेजी पढ़ाईलिखाई पर विश्वास रखते थे| और माताजी श्रीमती भुवनेश्वरी दत्त धार्मिक स्वभाव की महिला थी | वह उनका जादासे जादा समय भगवानजी की पूजाआराधना करने में बिताती थी| स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)  बचपन से ही कुशाग्र बुद्धिमत्ता के थे| वह योग और वेदांत में रूचि रखते थे|

स्वामी विवेकानंदजी का बचपन| Swami Vivekananda Childhood

स्वामी विवेकानंदजी(Swami Vivekananda) बचपनसे ही कुशाग्र बुद्धि के थे| वह बुद्धिमान होने के साथ साथ नटखट और शरारती थे| वह रोज पढ़ाई के साथ साथ  नियमितपूजापाठ भी करते थे| उनके परिवार का वातावरण धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरुप का था| और इसी वातावरण के कारण उनपर बचपन से ही धर्म एवं अध्यात्म के संस्कार हुवे| बचपन से ही उन्हें ईश्वर|परमात्मा को जानने और उसे प्राप्त करने की इच्छा हुवी| वह बोहत वैचारिक थे,बचपन से ही वह बड़े चिकित्सक थे,कोई भी बात का पूरा संकलन करके उसकी उत्सुकता बढ़ाके माताजी और पिताजी से वह प्रश्न पूछकर उनकी जानकारी लेते थे| कभी कभी उनके माताजी और पिताजी एवं उनके गुरुवर उनके प्रश्नसे अचंभित होते थे|  


स्वामी विवेकानंदजी की शिक्षा|Education of Swami Vivekanada

आठ साल की उम्र में Swami Vivekanand स्वामी विवेकानंद/नरेन्द्रनाथजी ने सन १८७१ को ईश्वर चंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में दाखला लिया|  सन१८७९  मेंकोलकाता में प्रेसिडेन्सी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में प्रथम डिवीज़न में अंक प्राप्त किये| १८८१ में स्वामी विवेकानंदजी नेललितकलाकीपरीक्षाउत्तीर्णकी| १८८४मेंकलास्नातककीडिग्रीपूरीकी| उन्हेंवेद,रामायण,महाभारत,भगवतगीताजैसेशास्त्रसाहित्यपढ़नेमेंबहोतरूचिथी| स्वामीविवेकानंदइतिहास, सामाजिकविज्ञान, धर्म, कलाऔरसाहित्यपढ़नेमेंरूचिरखतेथे, वहएकअच्छेपाठकथे| पढ़ाईकेसाथसाथस्वामीविवेकानंदयोग,खेल,शास्त्रीयसंगीतकाभीनित्यनियमसेसरावकरतेथे| उन्होंनेपश्चिमीतर्क, पश्चिमीदर्शनऔरयूरोपीयइतिहासअध्ययनजनरलअसेम्बलीइंस्टीटूशनमेंकिया|

 

स्वामी विवेकानंदजी के गुरु|Guru of Swami Vinekanandaji

स्वामीविवेकानंदजी(Swami Vivekanand)  केगुरुश्री. रामकृष्णपरमहंसजीथे| स्वामीविवेकानंदश्री. रामकृष्णपरमहंसजीकेपासतर्ककरनेकेविचारसेगएथे| गुरुकीकृपासेस्वामीविवेकानंदजीकोआत्मसाक्षात्कारहुवा| जबउन्होंनेसंन्यासलियातबसेउनकानामविवेकानंदहुवा| स्वामीजीअपनेगुरुकेशिष्योंमेंसेएकप्रमुखशिष्यथे| स्वामीविवेकानंदजीकीअपनेगुरुकेप्रतिबहोतश्रद्धाऔरनिष्ठाथी| गुरुसेवाएवंगुरुभक्तिउनकेव्यक्तिमत्वमेंबनाथा| स्वामीविवेकानंदजीनेअपनाजीवनअपनेगुरुकोसमर्पितकियाथा| गुरुश्री. रामकृष्णजी  के शरीरत्यागकेदिनोंमे  स्वामी विवेकानंदजीनेअपनेघरकुटुंबएवंअपनीखुदकीचिंताकियेबगैरवहदिनरातगुरुकीसेवाकरनेमेंलीनहोगएथे| गुरुकेआशीर्वादसेहीस्वामीविवेकानंदजीलोगोंकोआध्यात्मिऔरधार्मिकराहदिखानेलगे|

 

स्वामी विवेकानंदजी का कार्य|Work of Swami Vivekanand

स्वामीविवेकानंदजी(Swami Vivekananda)नेसंस्कृतग्रंथोंकेसाथसाथबंगालीसाहित्यभीसीखा| उन्होंनेनेकईपुस्तकोंकाबंगालीअनुवादकिया,जैसेकीस्पेंसरकीकिताबएजुकेशन।उन्होंने  डेविड ह्यूम, जोहानगोटलिबफिच, बारूकस्पिनोजा, ऑर्थरस्कूपइन्हार, चार्ल्सडार्विनइत्यादिकेकार्योंकाअध्ययनकिया| स्वामीविवेकानंदजीपहलेब्राम्होसमाजमेंगएलिकेनवहाउनकाजीनहींलगा| रामकृष्णपरमहंसजीकेसेवाकालबादउन्होंनेस्वामीविवेकानंदजीनेगरीबोंकीसेवाकरनेकेलिएरामकृष्णमिशनकीस्थापनाकियीथी| ( रामकृष्णमिशनकेद्वारास्कूलसऔरअस्पतालभीशुरूहै|) औरपुरेजगभरमेंरामकृष्णपरमहंसजीकेविचारलोगोंतकपहुँचाये| औरइसकेलिएस्वामीविवेकानंदजीनेदेशविदेशमेंरामकृष्णमठकीस्थापनाकी| स्वामीविवेकानंदआध्यात्मिकयुवागुरुथे| भारतकीयुवापीढ़ीअच्छीराहपरचलेइसलिएउन्होंने  ‘योग‘, ‘राजयोग‘, ‘ज्ञानयोगजैसेग्रंथनिर्माणकियेऔरनएयुवापीढ़ीकोनयागुरुमंत्रदिया| उन्होंनेअपनेआध्यात्मिकऔरधार्मिकज्ञानसेहरकिसीकोअच्छाजीवनकैसेजीतेहैयेसीखाया| उन्होंनेअपनेकार्यपरभरोसारखनेकीएवंअपनाधेय्यप्राप्तकरनेकेलिएडगमगातेकोशिशकरनेकीराहदिखाई

 

Vivekanada Chikago Speech|स्वामी विवेकानंद जी का शिकागो भाषण

विश्वधर्मसम्मेलनमेंस्वामीविवेकानंदजीने११सितंबर१८९३कोशिकागो(अमेरिका) मेंभाषणदियाथा|यहभाषणपुरेविश्वमेंबहुचर्चितरहा|विवेकानंदजीकाजबभीजिक्रआताहै,उनकेइसभाषणकीचर्चाजरूरहोतीहै।पढ़ेंविवेकानंदकावहविश्वप्रसिद्धभाषण…..

अमेरिकाकेबहनोऔरभाइयो,

आपकेइसस्नेहपूर्णऔरजोरदारस्वागतसेमेराहृदयअपारहर्षसेभरगयाहै।मैंआपकोदुनियाकीसबसेप्राचीनसंतपरंपराकीतरफसेधन्यवाददेताहूं।मैंआपकोसभीधर्मोंकीजननीकीतरफसेधन्यवाददेताहूंऔरसभीजाति, संप्रदायकेलाखों, करोड़ोंहिंदुओंकीतरफसेआपकाआभारव्यक्तकरताहूं।मेराधन्यवादकुछउनवक्ताओंकोभीजिन्होंनेइसमंचसेयहकहाकिदुनियामेंसहनशीलताकाविचारसुदूरपूरबकेदेशोंसेफैलाहै।मुझेगर्वहैकिमैंएकऐसेधर्मसेहूं, जिसनेदुनियाकोसहनशीलताऔरसार्वभौमिकस्वीकृतिकापाठपढ़ायाहै।हमसिर्फसार्वभौमिकसहनशीलतामेंहीविश्वासनहींरखते, बल्किहमविश्वकेसभीधर्मोंकोसत्यकेरूपमेंस्वीकारकरतेहैं।

मुझेगर्वहैकिमैंएकऐसेदेशसेहूं, जिसनेइसधरतीकेसभीदेशोंऔरधर्मोंकेपरेशानऔरसताएगएलोगोंकोशरणदीहै।मुझेयहबतातेहुएगर्वहोरहाहैकिहमनेअपनेहृदयमेंउनइजरायलियोंकीपवित्रस्मृतियांसंजोकररखीहैं, जिनकेधर्मस्थलोंकोरोमनहमलावरोंनेतोड़तोड़करखंडहरबनादियाथाऔरतबउन्होंनेदक्षिणभारतमेंशरणलीथी।मुझेइसबातकागर्वहैकिमैंएकऐसेधर्मसेहूं, जिसनेमहानपारसीधर्मकेलोगोंकोशरणदीऔरअभीभीउन्हेंपालपोसरहाहै।

आपकेइसस्नेहपूर्णऔरजोरदारस्वागतसेमेराहृदयअपारहर्षसेभरगयाहै।मैंआपकोदुनियाकीसबसेप्राचीनसंतपरंपराकीतरफसेधन्यवाददेताहूं।मैंआपकोसभीधर्मोंकीजननीकीतरफसेधन्यवाददेताहूंऔरसभीजाति, संप्रदायकेलाखों, करोड़ोंहिन्दुओंकीतरफसेआपकाआभारव्यक्तकरताहूं।मेराधन्यवादकुछउनवक्ताओंकोभीजिन्होंनेइसमंचसेयहकहाकिदुनियामेंसहनशीलताकाविचारसुदूरपूरबकेदेशोंसेफैलाहै।

मुझेगर्वहैकिमैंएकऐसेधर्मसेहूं, जिसनेदुनियाकोसहनशीलताऔरसार्वभौमिकस्वीकृतिकापाठपढ़ायाहै।हमसिर्फसार्वभौमिकसहनशीलतामेंहीविश्वासनहींरखते, बल्किहमविश्वकेसभीधर्मोंकोसत्यकेरूपमेंस्वीकारकरतेहैं।

मुझेगर्वहैकिमैंएकऐसेदेशसेहूं, जिसनेइसधरतीकेसभीदेशोंऔरधर्मोंकेपरेशानऔरसताएगएलोगोंकोशरणदीहै।मुझेयहबतातेहुएगर्वहोरहाहैकिहमनेअपनेहृदयमेंउनइस्त्राइलियोंकीपवित्रस्मृतियांसंजोकररखीहैं, जिनकेधर्मस्थलोंकोरोमनहमलावरोंनेतोड़तोड़करखंडहरबनादियाथा।औरतबउन्होंनेदक्षिणभारतमेंशरणलीथी।

मुझेइसबातकागर्वहैकिमैंएकऐसेधर्मसेहूं, जिसनेमहानपारसीधर्मकेलोगोंकोशरणदीऔरअभीभीउन्हेंपालपोसरहाहै।भाइयो, मैंआपकोएकश्लोककीकुछपंक्तियांसुनानाचाहूंगाजिसेमैंनेबचपनसेस्मरणकियाऔरदोहरायाहैऔरजोरोजकरोड़ोंलोगोंद्वाराहरदिनदोहरायाजाताहै|

जिस तरहअलगअलगस्त्रोतोंसेनिकलीविभिन्ननदियांअंतमेंसमुदमेंजाकरमिलतीहैं, उसीतरहमनुष्यअपनीइच्छाकेअनुरूपअलगअलगमार्गचुनताहै।वेदेखनेमेंभलेहीसीधेयाटेढ़ेमेढ़ेलगें, परसभीभगवानतकहीजातेहैं-Swami Vivekanand

वर्तमानसम्मेलनजोकिआजतककीसबसेपवित्रसभाओंमेंसेहै, गीतामेंबताएगएइससिद्धांतकाप्रमाणहै|

जो भीमुझतकआताहै, चाहेवहकैसाभीहो, मैंउसतकपहुंचताहूं।लोगचाहेकोईभीरास्ताचुनें, आखिरमेंमुझतकहीपहुंचतेहैं-Swami Vivekananda

सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएंऔरइसकेभयानकवंशजहठधमिर्तालंबेसमयसेपृथ्वीकोअपनेशिकंजोंमेंजकड़ेहुएहैं।इन्होंनेपृथ्वीकोहिंसासेभरदियाहै।कितनीबारहीयहधरतीखूनसेलालहुईहै।कितनीहीसभ्यताओंकाविनाशहुआहैऔरजानेकितनेदेशनष्टहुएहैं।

अगरयेभयानकराक्षसनहींहोतेतोआजमानवसमाजकहींज्यादाउन्नतहोता, लेकिनअबउनकासमयपूराहोचुकाहै।मुझेपूरीउम्मीदहैकिआजइससम्मेलनकाशंखनादसभीहठधर्मिताओं, हरतरहकेक्लेश, चाहेवेतलवारसेहोंयाकलमसेऔरसभीमनुष्योंकेबीचकीदुर्भावनाओंकाविनाशकरेगा।

Swami Vivekananda Meditation in hindi|स्वामी विवेकानंदजी का ध्यान

स्वामी विवेकानंदजी(Swami Vivekananda)कोपढ़ना बहोत पसंद था| वह कोई भीपुस्तक बड़े एकाग्रता सेपढ़ते थेऔर उसे समजते थे| उनकी स्मरणशक्ति बड़ी तेज थी| स्वामी विवेकानंद कहते थे,” पढ़ने केलिए बहोत जरुरी हैएकाग्रता औरएकाग्रता केलिए जरुरी हैध्यान“| ध्यान केद्वारा हमअपने इंद्रियों परसंयम  रख सकते है|ध्यान करने सेहमारी एकाग्रता बढ़ती है| स्वामी विवेकानंदजी प्रतिदिन ध्यान करते थेस्वामी जीके अनुसार अगर कोई भीव्यक्ति रोज प्रतिदिन ध्यान करे तोवह अपनी सीखने क्षमता/मस्तिष्क कीक्षमता कोबढ़ा सकता है| हमारा मस्तिष्क जितना एकाग्र रहेंगा, हमउतने जल्दी किसी चीज़ कोयाद करसकते है/रख सकते है| ध्यान हमारी एकाग्रता बढाती हैऔर हमें इसका अनुभव लेना चाहिए|

 

Short Note On Vivekanada|स्वामी विवेकानंद की जीवनी

स्वामीविवेकानंदजी(Vivekanand) कोकोन  नहींजानता?स्वामीविवेकानंदजीकाजन्म१२जनवरी१८६३मेंकोलकातामेंहुवाथा| स्वामीविवेकानंदजीकानामनरेन्द्रनाथदत्तथा| उनकेघरकावातावरणधार्मिकस्वरुपकाथा| इसिलएउन्हेंबचपनसेहीधार्मिकएवंआध्यात्मिरूचिथी| बचपनसेहीवहबड़ेचिकित्सकथे,कोईभीबातकापूरासंकलनकरकेउसकीउत्सुकताबढ़ाकेमाताजीऔरपिताजीसेवहप्रश्नपूछकरउनकीजानकारीलेतेथे| कभीकभीउनकेमाताजीऔरपिताजीएवंउनकेगुरुवरउनकेप्रश्नसेअचंभितहोतेथे|स्वामीविवेकानंद(Swami Vivekananda)बचपनसेहीकुशाग्रबुद्धिमत्ताकेथे| वहयोगऔरवेदांतमेंरूचिरखतेथे| स्वामीविवेकानंदजीकोपढ़नाबहोतअच्छालगताथा| वहजोकुछभीपढ़तेथेवहबड़ीएकाग्रतासेपढ़तेथे| स्वामीजीरामकृष्णपरमहंसजीकेशिष्यथे| वहीपरउन्हेंस्वामी  उपाधि मिली| स्वामीजीरोजध्यानकरतेथे| उनकाकहनाथाकीएकाग्रताबढ़ानेकेलिएध्यानकरनाबड़ामहत्वपूर्णहै,जिससेआपजोभीपढ़ोंगेवहआपकेजल्दीध्यानमेंरहताहै| स्वामीविवेकानंदजीबड़ेदेशभक्तथे| वहमहानवक्ताथे| उनकेभाषणसेअनेकयुवावर्गप्रोत्साहितहुवाहै| वहहमेशायुवापीढ़ीकोदेशभक्तिकामार्गदेतेरहे, अध्यात्मऔरधर्मीकसंगतहमारामनोबलकैसेबढ़ाताहैयेस्वामीजीनेसिखाया| उन्होंनेअपनेआध्यात्मिकऔरधार्मिकज्ञानसेहरकिसीकोअच्छाजीवनकैसेजीतेहैयेसीखाया| उन्होंनेअपनेकार्यपरभरोसारखनेकीएवंअपनाधेय्यप्राप्तकरनेकेलिएडगमगातेकोशिशकरनेकीराहदिखाई

Swami Vivekananda Birthday |राष्ट्रीय युवक दिन|Swami Vivekanand Jayanti

१९८४सेसंयुक्तराष्ट्रसंघइसवर्षकोआंतरराष्ट्रीययुवावर्षघोषितकियाथा| उसीकाऔचित्यसमझकरऔरमहत्वजानकरइसवर्षसेभारतसरकारने१२जनवरीइसदिनकोराष्ट्रीययुवकदिनमनानेकाघोषितकिया|  स्वामी विवेकानंदजीकाजन्मदिन१२जनवरी, पुरेभारतभरमेंराष्ट्रीययुवकदिनकेरूपसेमनायाजाताहै| स्वामीविवेकानंदजीकाजीवनआध्यात्मिऔरतार्किककसोटियोंसेसाझाहुवाथा| भारतीययुवापीढ़ीअच्छीराहपरचले,किसीकीबुरीसंगतमेंरहे|  देश सेवाऔरधर्मसेवाकरनेकीइच्छाउनमेरहे| सभीयुवकोंकोस्वामीविवेकानंदजी (Swami Vivekanand) केकार्यमहत्त्वपूर्णहै भारतीय युवाशक्तिधर्मदेशअध्यात्मइनसभीराहोंपेडगमगातेचलेइसलिएयुवकदिनमनायाजाताहै

 

Swami Vivekanada Thoughts in Hindi with English |Swami Vivekananad ke Upadesh |स्वामी विवेकानंद जी के कोट्स/स्वामी विवेकानंद जी के सुविचार|स्वामी विवेकानंद जी के विचार

 

✌ “उठो जागोऔरतबतकमतरुकोजबतकतुम्हेंलक्ष्यकीप्राप्तिनाहोजाए|”

 “Arise, awake and stop not till the goal is reached.”– Swami Vivekananda

✌ अगर आपके मनमें इच्छा हैतो आपकुछ भीकर सकते हो|”

“If you have the desire you can do anything.”– Swami Vivekanand

✌ जोआपकी मदद करता हैउसे कभी भूलो मत, जो आपसे प्यार करता हैउसे नफरत नाकरो औरजो आपपर भरोसा करता हैउसे कभी धोखा मतदो।

“Never forget the one who helps you, do not hate the one who loves you and never betray the one who trusts you.”- Swami Vivekananda

✌ यदि आपएक हज़ार बार असफल होते हैं, तोएक बार औरप्रयास करें।

“If you fail a thousand times, try one more time.”– Swami Vivekanand

✌ लोगों कोवो बोलने दोजो उन्हें पसंद है, अपने ऊपर भरोसा रखो। दुनिया आपके पैरों में होगी।

“Let people speak what they like, trust yourself. The world will be in your feet.”– Swami Vivekananda

✌ अपने आपमेंभरोसारखेंएकदिनपूराविश्वआपकेकदमोंमेंहोगा|”

“Trust yourself,the world will be in your feet.”– Swami Vivekanand

✌ भरोसा भगवानपरहैतोजोलिखाहैतक़दीरमेंवहीपाओगे, भरोसाखुदपरहै     तो भगवान वही लिखेगा जो आप चाहोगे|”

 “Trust in God, then you will get what is written in your destiny, if you have faith in  yourself, then God will write whatever you want.”– Swami Vivekananda

✌ ज्ञान स्वयंमेंवर्तमानहैमनुष्यकेवलउसकाआविष्कारकरताहै|”

 “Knowledge is present in itself, man only invents it.”– Swami Vivekanand

✌ जितना बड़ासंघर्षहोगाजीतउतनीहीशानदारहोगी|”

“The bigger the struggle, the more glorious the victory.”– Swami Vivekananda

✌ लक्ष्य केलिएखड़ेहोतोएकपेड़कीतरहगिरोताकिएकबीजकीतरहदोबाराउठकरउसजंगकेलिएलड़सको|”

“If you stand for the goal, fall like a tree so that you can rise again like a seed and fight for that war.”– Swami Vivekananda

✌ जब तकआपखुदपरविश्वासनहींकरतेहैंतबतकआपभगवानपरभीविश्वासनहींकरसकते|”

“Until you believe in yourself, you cannot believe in God.”– Swami Vivekanand

✌ अध्यात्मिक मार्गमेंमनुष्यकासच्चीशिक्षककेवलऔरकेवलउसकीआत्माहोतीहैं|”

“On the spiritual path the true teacher of man is his soul alone.”– Swami Vivekananda

✌ तुम परिश्रमकरकेस्वर्गकेज्यादानजदीकहोगे, बजायगीताकेअध्ययनकरके|”

“You will be closer to heaven by working hard rather than by studying the Gita.”– Swami Vivekananda

✌ एक समयमेंएककामकरोऔरऐसाकरतेसमयअपनीपूरीआत्माउसमेंडालदोऔर    बाकी सबकुछभूलजाओ|” 

“Do one thing at a time and while doing so put your whole soul into it and forget everything else.”– Swami Vivekananda

✌ आप ईश्वरमेंतबतकविश्वासनहींकरपाएंगेजबतकआपअपनेआपमेंविश्वासनहींकरते|” 

“You will not believe in God until you believe in yourself.”– Swami Vivekanand

✌ खुद कोकमजोरसमझनासबसेबड़ापापहै|”

“The greatest sin is to consider yourself weak.”– Swami Vivekananda

 ✌ जब तकजीनातबतकसीखनाअनुभवहीजगतमेंसर्वश्रेष्ठशिक्षाहै|”

“Learning as long as you live, experience is the best education in the world.”– Swami Vivekananda

 

Swami Vivekanand Death|How Did Vivekananda Die|When Vivekananda Died?| Swami Vivekananda Death Reason

जुलाई, १९०२मेंस्वामीविवेकानंदजी(Swami Vivekanand Death) कीमृत्युहुईथी| मृत्युसमयस्वामीजी३९वर्षकेथे| उनकेमृत्युकेदिनस्वामीविवेकानंदजीने  बेलूर मठमेंनित्यनियमजैसेउन्होंनेघंटेतकयोगकिया| उसकेबादवहअपनेगतिविधिमेंजुड़गए| कुछसमयबाद उनकी मृत्युकीखबरमठमेंफ़ैलगई| (स्वामीविवेकानंदजीकीमृत्युएकरहस्यजैसीहै|) स्वामीविवेकानंदजी (Swami Vivekananda)केशिष्य/मठकर्मी  यह मानतेहै, कीस्वामीजीनेखुदकेमर्जीसेसमाधीधारणकरकेप्राणत्यागदिया| औरअपनाशरीरत्यागदिया| परंतुवैज्ञानिक/मेडिकलसाइंसकेआधारोंपरमानतेहुवेस्वामीविवेकानंदजीकोब्रेनहैमरेजहुवाथा, जिसकेवजहसेउनकीमृत्युहुई| गंगानदीकेतटपरगुरुरामकृष्णपरमहंसजीकेअंत्यष्टिहुवीथी, उसीजगहपरस्वामीजीकाअंत्यसंस्कारकियागया


FAQ On Swami Vivekanand


What are the key works of Swami Vivekananda?

Swami Vivekananda’s key works are – The Complete Works of Swami Vivekananda, – Swami Vivekananda’s Speeches at the Parliament of Religions, Chicago, 1893 – Letters of Swami Vivekananda – Jnana Yoga: The Yoga of Knowledge – Yoga: The Yoga of Love and Devotion, etc

 

What is the childhood name of Swami Vivekananda?

Swami Vivekananda was an inspiring personality and was famous in the whole world. He was born on 12 January 1863, in Calcutta (now Kolkata). His childhood name was Narendranath Dutta, belonged to an affluent Bengali family in Calcutta (now Kolkata). He was one of the eight children of Vishwanath Dutta and Bhuvneshwari Devi

 

What is Swami Vivekananda known for?

Swami Vivekananda is best known for his groundbreaking speech to the 1893 World’s Parliament of Religions in which he introduced Hinduism to America and called for religious tolerance.


हिंदी लिरिक्सइंडियाकेतरफसेवेलकम| दोस्तो  छोटासा निवेदन, क्याआपस्वामीविवेकानंदजी (Swami Vivekananda)केबारेमेंहिंदीमेंजानकारीपढ़नापसंदकरतेहैं, तोकृपयाइसेशेयरकरेंक्योंकिइसेसाझाकरनेमेंआपकोकेवलएक  मिनट कासमयलगेगा।लेकिनयहहमारेलिएउत्साहऔरसाहसप्रदानकरेगा।जिसकीमददसेहमआपकेलिएसभीतरहकीनईजानकारीऔरगानोंकेबोलअथवारोचकजानकारीइसीतरहसेलातेरहेंगे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

   

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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