Sundarakanda slokas meaning in Hindi

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 Sundarakanda slokas meaning in Hindi

 

 
 

 

अयंच वीर संदेहःतिष्टतीव ममग्रतः ।

सुमहास्त्यत्सहायेषु हर्यक्षेषु हरीश्वरा

कथंनु खलु दुष्सारं तरिष्यति महोदधिम् ।

 

तानि हर्यक्षुसैन्यानि तौ वा नरवरात्मजौ ॥

 

Meaning:- हनुमान मुझे अभीभी वानरों केबारे में संदेहहै। भेलुकास

आपकासमर्थन कर रहेहैं। उन सेनाओंऔर राजकुमारों कोइस महासागर

सेकैसे पार कियाजा सकता हैजिन्हें पार करनाअसंभव है|

 

कामस्य त्वमेवैकः कार्यस्य परिसाधने।

पर्याप्तः परवीर्न यजस्यस्ते फलोदयः॥

वलैस्समधेवदिमं रवणं जित्यसंयुगे ।

विजयीस्वपुशयायात्‌ ततु मेस्याश्ास्करम्‌ ॥

-तचया तस्य विकरतंअनुरूपं महात्मनः।

बवेदाहव शरस्य तथा त्वमुपपादव॥

 

 

 

Meaning:- वास्तव में आपअकेले ही इसकार्य को पूराकरने के लिए

पर्याप्त हैं। लेकिनउस मामले मेंक्रेडिट एव उसकेलिए प्रसिद्धि केवल

आपके पास जाएगी।अगर श्रीराम रावणको युद्ध मेंहरा देते हैंतो मुझे

अपनीराजधानी में वापसले जाता हैजो सबसे उचितहोगा। इसलिए आप

उसकी योजना केअनुसार कार्य योजना बनातेहैं |

 

तदरयोपहितंवावयंसहितं हेतु संहितम्‌ ।

निक्ञम्य हनुमान्‌ दष वाकयमुररमब्रवीत्‌ ॥

देव हर्श सन्यनांईशर, प्लवतां वर।

 

सुग्रीवस्सत्वसंपत्नःतवार्थे कृतनिश्चयः ॥

 

Meaning:- सीता के उन सार्थक शब्दों को सुनकर हनुमान ने फिर शेष

 विचारों की बात की। “देवी सुग्रीव एक वानर एव भल्लूका सेनाओं का

 प्रतीक है। वह निर्धारित करती है कि आपको सुरक्षित होना चाहिए। “

 

 

 

 

 

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