संस्कृत श्लोका sanskrit shloka lyrics related to students in hindi

 संस्कृत श्लोका  sanskrit shloka lyrics related to students in hindi on vidya


दोस्तों आज कल हम लोगो को स्कूल मे  काफी सरे कम्पीटशन मे हिस्सा लेना होता है फिर वह खेल हो, पढाई हो, कोई क्विज हो, प्रतियोगिता हो हमें उसके लिए तैयारी करनी होती है| आज हम कुछ संस्कृत श्लोक विद्या के बारे मे जानेंगे और उन्का अर्थ जानेंगे |

||SANSKRIT SHLOKAS||

विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्

Meaning:- ज्ञान  विनम्रता प्रदान करता है जो बदले में योग्यता प्रदान करता है। उस योग्यता से व्यक्ति जीविकोपार्जन करता है। वह धन पुण्य का मार्ग प्रशस्त करता है जो बदले में सुख देता है।


||SANSKRIT SHLOKAS||

सुखार्थिनः कुतो विद्या विद्यार्थिनः कुतः सुखम्
सुखार्थी वा त्यजेत्विद्यां विद्यार्थी वा त्यजेत् सुखम्

Meaning:- जहाँ आरामदायक जीवन की इच्छा रखने वालों के लिए ज्ञान है और जहाँ ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखने वालों के लिए विलासिता है। जो लोग आराम चाहते हैं उन्हें ज्ञान का मार्ग छोड़ देना चाहिए और जो लोग ज्ञान की खोज में हैं उन्हें आराम छोड़ देना चाहिए।

||SANSKRIT SHLOKAS||

विद्याभ्यास स्तपो ज्ञानमिन्द्रियाणां संयमः
अहिंसा गुरुसेवा निःश्रेयसकरं परम्

Meaning:- विद्याभ्यास, तप, ज्ञान, इंद्रिय-संयम, अहिंसा और गुरुसेवाये परम् कल्याणकारक हैं

||SANSKRIT SHLOKAS||

विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥

Meaning:- विद्या से विनय (नम्रता) आती है, विनय से पात्रता (सजनता) आती है पात्रता से धन की प्राप्ति होती है, धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है

||SANSKRIT SHLOKAS||

गुरु शुश्रूषया विद्या पुष्कलेन् धनेन वा।
अथ वा विद्यया विद्या चतुर्थो उपलभ्यते॥

Meaning:- विद्या गुरु की सेवा से, पर्याप्त धन देने से अथवा विद्या के आदान-प्रदान से प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त विद्या प्राप्त करने का चौथा तरीका नहीं है

||SANSKRIT SHLOKAS||

विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिः तत्परता क्रिया
यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते

Meaning:- विद्या, तर्कशक्ति, विज्ञान, स्मृतिशक्ति, तत्परता, और कार्यशीलता, ये छे जिसके पास हैं, उसके लिए कुछ भी असाध्य नहि

||SANSKRIT SHLOKAS||

विद्याभ्यास स्तपो ज्ञानमिन्द्रियाणां संयमः
अहिंसा गुरुसेवा निःश्रेयसकरं परम्

Meaning:- विद्याभ्यास, तप, ज्ञान, इंद्रिय-संयम, अहिंसा और गुरुसेवाये परम् कल्याणकारक हैं

||SANSKRIT SHLOKAS||

पुस्तकस्था तु या विद्या,परहस्तगतं धनम् |
कार्यकाले समुत्तपन्ने सा विद्या तद् धनम् ||
Meaning:- पुस्तक में रखी विद्या तथा दूसरे के हाथ में गया धनये दोनों ही ज़रूरत के समय हमारे किसी भी काम नहीं आया करते |

||SANSKRIT SHLOKAS||

विद्या मित्रं प्रवासेषु,भार्या मित्रं गृहेषु |
व्याधितस्यौषधं मित्रं, धर्मो मित्रं मृतस्य ||

Meaning:- ज्ञान यात्रा में,पत्नी घर में, औषध रोगी का तथा धर्म मृतक का (सबसे बड़ा) मित्र होता है |


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