10 Sanskrit Quotes| Sanskrit Quotes | Famous Sanskrit Quotes

 

संस्कृत Quotes-10 Sanskrit Quotes-Sanskrit-Quotes-Famous Sanskrit Quotes




विद्यार्थी मित्रों भारतीय संस्कृति में संस्कृत श्लोकों एवं Sanskrit Quotes का बहुत महत्त्व है| हमारे ऋषिमुनियोंने, धार्मिक ग्रंथोमे बोहोत सारे संस्कृत श्लोक एवं Sanskrit Quotes दिए गए है| बहोत सारी ज्ञान की बातें संस्कृत श्लोकों एवं Sanskrit Quotes के रूप में महाभारत, रामायण,चाणक्यनिति जैसे ग्रंथोमे लिखी हैं| विद्यार्थी विशेष रूप से इन श्लोकों को पढ़ कर उनका अर्थ समझ सकते हैं और उन्हें अपने जीवन में उतारकर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। क्यूकी हमे पुस्तकी ज्ञान के अलावा हमारी पर्सनालिटी डेवलप करने के लिए, एवं दूसरोंके साथ बात करते हुवे, या फिर निबंध लिखते हुवे या किसी विषय पर भाषण देने के लिए कई बार अनेक श्लोक एवं Sanskrit Quotes की जरुरत होती है| जिससे हमारा वकृत्व दूसरोंसे कैसे अलग है,और हमारा ज्ञान दूसरोंके साथ शेयर कर सके| तो आइये हम संस्कृत श्लोका एवं कोट्स की जानकारी लेते है| 



 उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्।

सोत्साहस्य च लोकेषु न किंचिदपि दुर्लभम्॥

भावार्थ:- उत्साह बहुत बलवान होता है, उत्साह से बड़ा कोई बल नहीं है,

उत्साह परम् बल है, उत्साही व्यक्ति के लिए इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं है। 



✌ अलसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम्।

अधनस्य कुतो मित्रं अमित्रस्य कुतो सुखम्॥

भावार्थ:- जो आलस करते हैं उन्हें विद्या नहीं मिलती, जिनके पास विद्या

नहीं होती वो धन नहीं कमा सकता, जो निर्धन हैं उनके मित्र नहीं होते और

मित्र के बिना सुख की प्राप्ति नहीं होती

✌ नरस्याभरणं रूपं रूपस्याभारणं गुनः।

गुणस्याभरणं ज्ञानं ज्ञानस्याभरणं क्षमा॥

भावार्थ:- मनुष्य का अलंकार उसका रूप होता है, रूप का अलंकार गुण

होता है, गुण का अलंकार ज्ञान होता  है और ज्ञान का अलंकार क्षमा होता

है।


✌ व्यसने मित्रपरीक्षा शूरपरीक्षा रणाङ्गणे भवति।

विनये भृत्यपरीक्षा दानपरीक्षाच दुर्भिक्षे॥

भावार्थ:- बुरा समय आने पर मित्र की परीक्षा होती है, युद्धस्थल (रणांगण)

 में शूरवीर की परीक्षा होती है, नौकर की परीक्षा विनय से होती है और दान

 की परीक्षा अकाल पड़ने पर होती है।


✌ पुस्तकस्था तु या विद्या परहस्तगतं धनम्।

कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद् धनम्॥

भावार्थ:- पुस्तक में रखी हुई विद्या(अगर उसे पढ़ा न जाये) और स्वयं का

 धन यदि किसी अन्य के हाथों में हो वह आवश्यकता पर काम नहीं देता है।

 इसीलिए हमारी परिश्रम से प्राप्त विद्या एवं कमाया हुआ धन ही हमें

 समय-समय पर काम देता है।


✌ चिता चिन्तासम ह्युक्ता बिन्दुमात्र विशेषतः।

सजीवं दहते चिन्ता निर्जीवं दहते चिता॥

भावार्थ:- चिता और चिंता में मात्र एक बिन्दु (अनुस्वार) का ही फर्क है,

 किन्तु दोनों ही एक समान है, जो चिंता जीवित व्यक्ति को जलाती है, और

 चिता  जो मरने के बाद (निर्जीव) को जलाती है ।

 

✌ अपूर्व कोपि कोशोयं विद्यते तव भारति।

व्ययतो वृद्धमायाति क्षयमायाति संचयात्॥

भावार्थ:- हे माता विद्या की देवी सरस्वती! आपकी दियी हुवी विद्या बहुत

ही अपूर्व है, जिसे खर्च करने पर बढ़ती जाती  है और संचय करने पर घटने

लगती  है।

 

✌ यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम्।

लोचनाभ्यांविहीनस्य दर्पणः किं करिष्यति॥

भावार्थ:- जिसके पास अपनी बुद्धि नहीं हैअपना विवेक नहीं है,ऐसे 

विवेकहीन(अज्ञानी,बुद्धिहीन) व्यक्ति के लिए शास्त्र भी कुछ नहीं कर

सकते। जिस प्रकार से अन्धे व्यक्ति के लिए दर्पण कुछ नहीं कर सकता|

 

✌ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् 

भावार्थ:- (हे परमेश्वरहमें ऐसा वर दो),  सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त

(निरोगी) रहें, सभी का जीवन मंगलमय बनें और किसी को दुःख का भागी

बनना पड़े।

 

✌ यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रियाः ।

चित्ते वाचि क्रियायांच साधुनामेक्रूपता ॥

भावार्थ:- जैसे व्यक्ति का मन होता है वैसी ही वाणी होती है, जैसी वाणी

होती है वैसे ही कार्य होता है। सज्जनों के मन​, वाणी और कार्य में एकरूपता

 (समानता) होती है ।


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